Tatpurush Samas उदाहरण, परिभाषा, भेद जानिए आसान शब्दो मे
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Tatpurush Samas (तत्पुरूष समास),उदाहरण,परिभाषा,भेद जानिए आसान शब्दो मे

Tatpurush Samas
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तत्पुरुष समास, संस्कृत व्याकरण में एक महत्वपूर्ण अंग है जो शब्दों के मेल-मिलाप को स्पष्ट करने का कार्य करता है। इसे एक प्रकार का समास कहा जाता है जो दो या दो से अधिक पदों के मेल से उत्पन्न होता है। इसे समझने के लिए हमें कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

तत्पुरुष समास का अर्थ: शब्द ‘तत्पुरुष’ से ही स्पष्ट होता है कि इस समास में दोनों पदों का मेल होता है। ‘तत्’ शब्द से सूचित होता है कि यह समास दूसरे पद के साथ मिलकर एक नया शब्द बनाता है।

तत्पुरुष समास के प्रकार: तत्पुरुष समास के तीन प्रकार होते हैं – द्वंद्व, बहुव्रीहि, और कर्मधारय।

  1. द्वंद्व समास: द्वंद्व समास में दोनों पदों का मेल होता है और उनमें से हर एक पद स्वतंत्र भी अर्थपूर्ण होता है। उदाहरण के लिए, ‘सुनील-चन्दन’ में ‘सुनील’ और ‘चन्दन’ दोनों ही पद स्वतंत्र अर्थवाची हैं।
  2. बहुव्रीहि समास: इस समास में बहुत्वकारक शब्द अथवा शब्दों का समूह होता है जिससे एक नया शब्द बनता है। उदाहरण के लिए, ‘दशहाथी’ में ‘दस’ शब्द से अभिव्यक्त होता है कि यह समास दस हाथियों की बात कर रहा है।
  3. कर्मधारय समास: इसमें किसी शब्द का कर्ता और कर्म का बोध होता है। उदाहरण के लिए, ‘राजा-कुमार’ में ‘राजा’ शब्द का कर्ता और ‘कुमार’ शब्द का कर्म है।

Tatpurush Samas की पहचान

  1. तत्पुरष समास में दूसरा पद प्रधान होता है।
  2. तत्पुरष समास में उत्तर पद प्राय: विशेष्य का काम करता है और इसका पूर्व पद विशेषण होता है।
  3. तत्पुरष समास में लिंग तथा वचन का प्रयोग अन्तिम पद के अनुसार होता है।
  4. तत्पुरुष समास के पूर्व पद में ही कारक चिह्नो का प्रयोग किया जाता है।
  5. तत्पुरष समास के विग्रह में कर्ता और सम्बोधन कारक को छोड़कर शेष सभी कारक चिह्नो का प्रयोग होता है।

इस समास में आने वाले कारक चिन्हों को, से, के लिए, से, का/के/की, में, पर आदि का लोप होता है।

Tatpurush Samas तत्पुरुष समास के उदाहरण :

  • मूर्ति को बनाने वाला — मूर्तिकार
  • काल को जीतने वाला — कालजयी
  • राजा को धोखा देने वाला — राजद्रोही
  • खुद को मारने वाला — आत्मघाती
  • मांस को खाने वाला — मांसाहारी
  • शाक को खाने वाला — शाकाहारी

Tatpurush Samas तत्पुरुष समास के भेद

कारक चिन्हों के अनुसार इस समास के छः भेद हो जाते है।

  1. कर्म तत्पुरुष समास
  2. करण तत्पुरुष समास
  3. सम्प्रदान तत्पुरुष समास
  4. अपादान तत्पुरुष समास
  5. सम्बन्ध तत्पुरुष समास
  6. अधिकरण तत्पुरुष समास

1. कर्म तत्पुरुष समास :-

यह समास को’ चिन्ह के लोप से बनता है।   जैसे :

  • ग्रामगत : ग्रामको गया हुआ।
  • यशप्राप्त : यशको प्राप्त।
  • स्वर्गगत : स्वर्गको गया हुआ।
  • ग्रंथकार : ग्रन्थको लिखने वाला।
  • माखनचोर : माखनको चुराने वाला।
  • सम्मानप्राप्त : सम्मानको प्राप्त

ऊपर दिए गए उदाहरणों में जैसा की आप देख सकते हैं यहां सभी शब्दों में उत्तरपद प्रधान है एवम पूर्वपद गौण है। जब इनका समास किया जाता है तब इनके बीच में को योजक चिन्ह का लोप हो जाता है।

अतः ये उदाहरण कर्म तत्पुरुष समास के अंतर्गत आएंगे।

  • परलोकगमन : परलोकको गमन।
  • शरणागत : शरणको आया हुआ।
  • आशातीत : आशाको लाँघकर गया हुआ।
  • सिरतोड़ : सिरको तोड़ने वाला।
  • गगनचुम्बी : गगनको चूमने वाला।
  • रथचालक : रथको चलाने वाला।
  • जेबकतरा : जेबको कतरने वाला।

जैसा की आप ऊपर दिए गए उदाहरणों में देख सकते हैं की यहाँ भी सभी शब्दों में उत्तरपद प्रधान है एवम पूर्वपद गौण है। जब इनका समास किया जाता है तब इनके बीच में को योजक चिन्ह का लोप हो जाता है।

अतः ये उदाहरण कर्म तत्पुरुष समास के अंतर्गत आएंगे।

2. करण तत्पुरुष समास :

यह समास दो कारक चिन्हों से और के द्वारा के लोप से बनता है।  जैसे:

  • करुणापूर्ण : करुणासे पूर्ण
  • शोकाकुल : शौकसे आकुल
  • वाल्मीकिरचित : वाल्मीकिद्वारा रचित
  • शोकातुर : शोकसे आतुर
  • कष्टसाध्य : कष्टसे साध्य
  • मनमाना : मनसे माना हुआ
  • शराहत : शरसे आहत

ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा की आप देख सकते हैं यहां सभी शब्दों में उत्तरपद प्रधान है एवम पूर्वपद गौण है। जब इनका समास किया जाता है तब इनके बीच में से योजक चिन्ह का लोप हो जाता है।

अतः ये उदाहरण करण तत्पुरुष समास के अंतर्गत आएंगे।

  • अकालपीड़ित : अकालसे पीड़ित
  • भुखमरा : भूखसे मरा
  • सूररचित : सूरद्वारा रचित
  • आचार्कुशल : आचारसे कुशल
  • रसभरा : रससे भरा
  • मनचाहा : मनसे चाहा

जैसा की आप ऊपर दिए गए उदाहरणों में देख सकते हैं यहां सभी शब्दों में उत्तरपद प्रधान है एवम पूर्वपद गौण है। जब इनका समास किया जाता है तब इनके बीच में से योजक चिन्ह का लोप हो जाता है।

अतः ये उदाहरण करण तत्पुरुष समास के अंतर्गत आएंगे।

3. सम्प्रदान तत्पुरुष समास :

इस समास में कारक चिन्ह के लिए’ का लोप हो जाता है। जैसे:

  • प्रयोगशाला : प्रयोगके लिए शाला
  • डाकगाड़ी : डाकके लिए गाडी
  • रसोईघर : रसोईके लिए घर
  • यज्ञशाला : यज्ञके लिए शाला
  • देशार्पण : देशके लिए अर्पण
  • गौशाला : गौओंके लिए शाला
  • सत्याग्रह : सत्यके लिए आग्रह

ऊपर दिए गए उदाहरणों में जैसा की आप देख सकते हैं यहां सभी शब्दों में उत्तरपद प्रधान है एवम पूर्वपद गौण है। जब इनका समास किया जाता है तब इनके बीच में के लिए योजक चिन्ह का लोप हो जाता है।

अतः ये उदाहरण सम्प्र्दान तत्पुरुष समास के अंतर्गत आएंगे।

  • पाठशाला : पाठके लिए शाला
  • देशभक्ति : देशके लिए भक्ति
  • विद्यालय : विद्याके लिए आलय
  • हथकड़ी : हाथके लिए कड़ी
  • सभाभवन : सभाके लिए भवन
  • लोकहितकारी : लोकके लिए हितकारी
  • देवालय : देवके लिए आलय
  • राहखर्च : राहके लिए खर्च

4. अपादान तत्पुरुष समास :

इस समास में अपादान कारक के चिन्ह ‘से’ का लोप हो जाता है। जैसे:

  • ऋणमुक्त : ऋणसे मुक्त
  • धनहीन : धनसे हीन
  • गुणहीन : गुणसे हीन
  • विद्यारहित : विद्यासे रहित
  • पथभ्रष्ट : पथसे भ्रष्ट
  • जीवनमुक्त : जीवनसे मुक्त
  • रोगमुक्त : रोगसे मुक्त
  • बंधनमुक्त : बंधनसे मुक्त
  • दूरागत : दूरसे आगत
  • जन्मांध : जन्मसे अँधा
  • नेत्रहीन : नेत्रसे हीन
  • पापमुक्त : पापसे मुक्त
  • जलहीन : जलसे हीन

5. सम्बन्ध तत्पुरुष समास

सम्बन्ध कारक के चिन्ह का’, ‘के’ व की’ का लोप होता है वहां सम्बन्ध तत्पुरुष समास होता है। जैसे:

  • भूदान : भूका दान
  • राष्ट्रगौरव : राष्ट्रका गौरव
  • राजसभा : राजाकी सभा
  • जलधारा : जलकी धारा
  • भारतरत्न : भारतका रत्न
  • पुष्पवर्षा : पुष्पोंकी वर्षा
  • उद्योगपति : उद्योगका पति
  • पराधीन : दूसरोंके आधीन
  • सेनापति : सेनाका पति
  • राजदरबार : राजाका दरबार
  • देशरक्षा : देशकी रक्षा
  • गृहस्वामी : गृहका स्वामी

6. अधिकरण तत्पुरुष समास :

इस समास में कारक चिन्ह में’ और पर’ का लोप होता है। जैसे:

  • गृहप्रवेश : गृहमें प्रवेश
  • पर्वतारोहण : पर्वत पर आरोहण
  • ग्रामवास : ग्राममें वास
  • आपबीती : आपपर बीती
  • जलसमाधि : जलमें समाधि
  • जलज : जलमें जन्मा
  • नीतिकुशल : नीतिमें कुशल
  • नरोत्तम : नारोंमें उत्तम
  • गृहप्रवेश : गृहमें प्रवेश

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